कभी बिताते थे रातें फूटपाथ पर आज ‘तारक मेहता का उल्टा चश्मा’ में बने हुए है डॉक्टर। - Arrah City | Arrah Bhojpur Bihar News

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कभी बिताते थे रातें फूटपाथ पर आज ‘तारक मेहता का उल्टा चश्मा’ में बने हुए है डॉक्टर।

कभी बिताते थे रातें फूटपाथ पर आज ‘तारक मेहता का उल्टा चश्मा’ में बने हुए है डॉक्टर।

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सब टीवी पर चल रहे सबसे पॉपुलर शो "तारक मेहता का उल्टा चश्मा " के डॉ. हंसराज हाथी उर्फ़ "कवि कुमार आज़ाद"

कवि कुमार आज़ाद

तारक मेहता का उल्टा चश्मा के डॉ हाथी असल में आरा बिहार से हैं। आईये जानते है उनके बारे में।

जिंदगी कब नया मोड़ ले ले ये कोई नहीं जानता। किस्मत के ताले किसी को पूछ कर नहीं खुलते। ‘तारक मेहता का उल्टा चश्मा’ पॉपुलर शो में डॉक्टर हाथी का रोल मिल जायेगा ये बात फूट पाथ पर सोने वाले ने ‘आजाद कवि’ ने कभी नहीं सोची थी। जी हाँ भारत का सबसे बड़ा कॉमेडी शो ‘तारक मेहता का उल्टा चश्मा’ में डक्टर हाथी का असली नाम है ‘कवि कुमार आजाद’ है।

सपने हर कोई देखता है 'आजाद कवि' ने भी एक्टर बनने के सपने देखे थे। और एक्टर बनाने के लिए चाहे इनसे कुछ भी करवा लो। आजाद कवि के माता पिता इनके इस सपने से से खफा थे क्योंकि उनका मानना था कि टीवी पे दिखाई देना कोई मामूली बात नहीं है। आजाद ने पहले कहीं सुना था कि मुम्बई जाने वालो को आसानी से एक्टर बना दिया जाता है। और माता पिता के चलते इसी रवैये से तंग आकर एक दिन मुम्बई चले गए।

जब तक सही समय नहीं आता तब तक इंसान को कड़ा संघर्ष करना पड़ता है। ऐसा ही आजाद के साथ हुआ। आजाद में टैलेंट तो था। पर इसको पहचानने वाला कोई नहीं था। शुरू में तो इनको कोई अच्छा रोल ना मिलने के कारण इनके पास इतना भी पैसा नहीं था कि ये किसी को रहने का किराया दे पाएं। इसलिए आजाद फुटपाथ पर ही सो जाते थे।

एक दिन आजाद किसी नाटक की रिहर्शल कर रहे थे तभी इनके पास एक बुलावा आया कि ‘आपको हमारे बॉस ने बुलाया है’ बस यही से इनकी जिंदगी ने अच्छा मोड़ लिया और इनको तारक मेहता का उल्टा चश्मा में ‘हंसराज हाथी’ का रोल मिल गया।

इन्होंने सीरिअल्स के साथ साथ कुछ हिंदी और भोजपुरी फिल्मों में भी काम किया है।
कुछ हिंदी फिल्में-
* मेला (2000)
* फनटूस (2002)

टीवी सीरिअल्स-
तारक मेहता का उल्टा चश्मा (2008 - वर्तमान)

भोजपुरी फ़िल्म-
* हमार रजऊ दरोगा नं 1 (2007)

जिसमे उन्हीने कॉमेडी के जाने माने कलाकार और अभिनेता "गोविंदा" के भगिना "कृष्णा अभिषेक" के साथ काम किया था, जो की फिल्म की पूरी शूटिंग आरा शहर और इसके आस पास के कई गांव में हुई थी।

शो में लोग कवि कुमार आज़ाद को एक डॉक्टर के रूप में देखते है पर इनको सच में इलाज करना आता है या नहीं। ये बात तो ये खुद ही जाने।

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